51 शक्ति पीठ

भारत वर्श शक्ति एवं साधना का पवित्र स्थान है। ये साधना के विशिश्ट स्थान शक्ति पीठ के नाम से जाने जाते हैं। एक बार राजा प्रजापति दक्ष ने गंगा के पावन तट कनखल (हरिद्वार) में विशाल यज्ञ का आयोजन किया था। उस यज्ञ मे सभी को निमन्त्रण दिया। परंतु भगवान शंकर और उनकी पत्नी सती को नहीं बुलाया।

वीरभद्र अपने गणों के साथ दक्षपुरी कनखल (हरिद्वार) में गए और उन्होंने यज्ञ को नश्ट कर राजा दक्ष का शिर काट दिया। इस प्रकार यज्ञ के रक्षक ब्रह्म जी कैलाश पर्वत पर गए तथा दक्ष को जीवित करने और यज्ञ पूर्ण करने की प्रार्थना की। ब्रह्म जी की इस प्रार्थना को सुनकर भगवान शंकर ने वीरभद्र से दक्ष को जीवित करने और यज्ञ पूर्ण करने का आदेश दिया। भगवान शंकर के चरणों के प्रहारों से भूमि कांपने लगी। देवताओं को चिन्ता हुई कि इस रौद्र रूप को कैसे शान्त किया जाए। उस समय जगत के रक्षक भगवान विश्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े करके इस भू भाग पर अनेक स्थानों पर गिराए। जहां-जहां यह 51 अंग गिरे वे स्थान महातीर्थ और सिद्ध शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध हुए

1. कालीघाट शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ पश्चिमी बंगाल में गंगा नदी के किनारे हुगली नामक स्थान पर है। यहां सती के दाएं पैर की 4 अंगुलियां गिरी थी।

2. भूतधात्री शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ वर्धमान जिले में क्षीर ग्राम में है। यहां सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था।

3. भ्रामरी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ जलपाईगुड़ी में तिस्ता नदी के किनारे है। यहां सती का बायां चरण गिरा था।

4. बहुलेश्वरी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ हावड़ा के पास नवद्वीप धाम के पास केतु ब्रह्म स्थान पर स्थित है। यहां सती का बायां बाजु गिरा था।

5. महिशामर्दिनी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ दुबराजपुर के समीप बाकेश्वर नदी के तटपर स्थित है। यहां गरम पानी के कई झरने विद्यमान हैं जिन्हें पाप हरण कुण्ड भी कहते हैं। यहीं पर अष्टाचक्र ऋशि का आश्रम भी विद्यमान है। यहां सती का मन गिरा था।

6. कालिका शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ शान्ति निकेतन के पास नलहटी पर्वत पर स्थित है। यहां सती के पेट की नली गिरी थी।

7. नन्दिकेश्वर शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ नन्दीपुर स्थान पर स्थित है। यहां एक अति प्राचीन व विशाल वटवृक्ष विद्यमान है। यहां सती के गले का हार गिरा था।

8. अप्हास शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ वर्धमान जिले के लाबपुर स्थान में है। यहां सती का नीचे का होंठ गिरा था।

9. किरीट शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ लालबाग कोर्ट के समीप गंगा तट पर बंगनगर में स्थित है। यहां सती के सिर का आभूशण गिरा था।

10. यशोरेश्वरी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ बांगलादेश के खुलना जिले के जैशोर नामक स्थान पर है। यहां सती के बायें हाथ की हथेली गिरी थी।

11. भवानी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ चटगांव के पास चन्द्रशेखर पर्वत पर स्थित है। यहां विशाल कुण्ड से निरन्तर अग्नि निकलती रहती है। यहां सती का दायां बाजु गिरा था।

12. अपर्णा शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ बांगलादेश बोगंड़ा शहर के भवानीपुर स्थान पर स्थित है। यहां भगवती का बायां तल्प (बायीं कनपटी) गिरा था।

13. भीमरूपा शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ मिदनापुर के पास रूपनारायण नदी के तट पर स्थित है। यहां सती के बायंे पैर का टखना (गिट्टा) गिरा था।

14. सुगन्धा शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ बांग्लादेश में बारीसाल के समीप शिकारपुर में सुनन्दा नदी के तट पर स्थित है। यहां सतीकी नासिका गिरी थी।

15. अवन्तिका शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे भैरव पर्वत पर है। यहां सती का ऊपरी ओश्ठ गिरा था।

16. षारदा शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ चित्रकूट में रामगिरी आश्रम के समीप है। यहां सती का दायां स्तन गिरा था।

17. हरसिद्धि शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ उज्जैन में रूद्र सरोवर के समीप स्थित है। यहां भगवती मंगला चण्डी का स्वरूप विद्यमान है। इस शक्ति पीठ में बड़े-बड़े दीप स्तम्भ हैं। यहां सती की कोहनी गिरी थी।

18. ताराचण्डी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ बिहार के साहासाराम के पास अमरकण्टक पर्वत में स्थित है। यहां सती का दांया नितम्ब गिरा था।

19. नारायणी शक्ति पीठः-यह शक्ति पीठ तीन सागरों के संगम स्थान कन्याकुमारी (कन्यातीर्थ) के पास शुचीन्द्र (ज्ञानवान क्षेत्र) स्थान पर स्थित है। यहां सती के ऊपरी दांत गिरे थे।

20. कुमारी शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ चेन्नई के समीप रत्नावली पर्वत पर है। यहां सती का दायां स्कन्ध गिरा था।

21. षर्वाणी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ तीनों सागरों के संगम स्थल कन्यक आश्रम पर्वत पर स्थित है। यहां सती की पीठ का भाग गिरा था।

22. कामाक्षी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ तामिलनाडु के कांजीवरम् शहर के नजदीक शिवकांची नगर में स्थित है। यहां पर अन्नपूर्णा, शारदा, आद्य शंकराचार्य की भव्य मूर्तियां हैं। यहां सती का पिंजर (कंकाल) गिरा था।

23. जय मंगला देवी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ समस्तीपुर के सलौना शहर के पास है। यहां सती का बायां कन्धा गिरा था।

24. जय दुर्गा शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ श्री बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग की पावन भूमि (देवघर, झारखण्ड) में स्थित है। यहां सती का हृदय गिरा था।

25. सर्वानन्दकरी शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ पटना शहर के नज़दीक महाराज गन्ज में है। यहां सती की दायीं जघां गिरी थी।

26. बिन्ध्यावासिनी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ वृन्दावन मथुरा के बीच भूतेश्वर में स्थित है। यहां महाऋशि शाण्डिल्य ने तपस्या की थी। यहां सती के केश गिरे थे।

27. मणिकर्णिका शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ वाराणसी के मीरघाट पर है। यहां सती के दायें कान की मणि गिरी थी।

28. ललितादेवी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ प्रयागराज (इलाहाबाद) में अक्षय वट विशाल वृक्ष के नीचे स्थित है। यहां सती के हाथ की अंगुली गिरी थी।

29. मणिवेदिका शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ पुश्कर धाम के सरोवर के साथ पर्वत की चोटी पर स्थित है। जिसे गायत्री शक्ति के रूप में जाना जाता है। यहां सती की मणिबन्ध (कलाइयां) गिरी थी।

30. अम्बिका शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ जयपुर के पास विराट नगरमेंस्थितहै।यहां सती के दायें पैर की अंगुलियां गिरी थी।

31. अम्बा जी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ गुजरात में गिरनार पर्वत के ऊपर स्थित है। यहां जगत्जननी सती का उदर (पेट) भाग गिरा था। यहीं भैरव पर्वत भी है ।

32. विश्वेश्वरी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ आन्ध्रप्रदेश में गोदावरी के पार कुब्बुर में स्थित है। इसे कोटि तीर्थ भी कहते हैं। यहां सती का बायां गाल गिरा था।

33. श्रीशैल शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के पास है। यहां सती की गर्दन गिरी थी।

34. महालक्ष्मी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ कोल्हापुर के करबीर पुण्य क्षेत्र में स्थित है। यहां महालक्ष्मी का विशालमन्दिर है। यहां सती का तीसरा नेत्र गिरा था।

35. भ्रामरी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ नासिक के पास पंचवटी में स्थित है। यहां सती की ठोड़ी गिरी थी।

36. सुन्दरीशक्तिपीठः-यह शक्ति पीठ कश्मीर में श्री पर्वत पर स्थित है। यहां सती का दायां तल्प (कनपटी) गिरा था।

37. महामाया शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ कश्मीर में अमरनाथ गुफा में स्थित है। इसे हिम शक्तिपीठ नाम से भी जाना जाता है। यहां सती का कण्ठ गिरा था।

38. जालन्धर शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ पंजाब के जालन्धर शहर में है। जिसे देवी तालाब त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ के नाम से जानते हैं। यहां भगवान शंकर ने जालन्धर नामक दैत्य का वध किया था। यहां सती का बायां स्तन गिरा था।

39. विमला शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ उड़ीसा के श्री जगन्नाथ पुरी धाम में स्थित है। यहां सती की नाभि गिरी थी।

40. ज्वालामुखी शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ हिमाचल के कांगड़ा जिले की धौलाधार पर्वत पर है। यहां प्राचीन काल से ही ज्योतियाँ ज्वाला रूप में प्रज्जवलित हो रही हैं। यहां भगवती ज्वालारूप में विद्यमान हैं। वहां पानी की नहर निरन्तर बहती रहती है। यहां सती की जिह्वा गिरी थी।

41. कामाख्या शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ आसाम में ब्रं̃पुत्र नदी के तट पर गुवाहाटी के कामगिरि पर्वत पर स्थित है। यहां सती का योनि भाग गिरा था।

42. जयन्तीशक्तिपीठः-यह शक्ति पीठ मेघालय के शिलांग शहर के पास जयन्ती पर्वत पर स्थित है। यहां सती की बायीं जंघा गिरी थी।

43. त्रिपुर सुन्दरी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ त्रिपुरा के राधाकिशोरपुर शहर के पास मातावाड़ी पर्वत पर स्थित है। यहां सती का दक्षिण पैर गिरा था।

44. भद्रकाली शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ हरियाणा के कुरुक्षेत्र शहर के द्वैपायन सरोवर के पास स्थित है। इस शक्तिपीठ स्थान पर महाभारत युद्ध से पहले विजयकामना के लिए पूजा एवं यज्ञ किया गया था। यहां सती के गुल्फ (टखना) गिरा था।

45. काली शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ मध्यप्रदेश के शोण नही के तट पर अमरकण्टक की गुफा में स्थित है। यहां सती का बायां नितम्ब गिरा था।

46. चण्डी शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ नेपाल में गण्डकी नदी के तट पर पोखरा पर्वत पर स्थित है। यहां सती के मस्तक का कपोल भाग गिरा था।

47. महामाया शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ नेपाल में पशुपति नाथ मन्दिर के पास बागमती नदी के तट पर है। यह नेपाल की अधिश्ठात्री देवी है, इस भव्य एवं विशाल मन्दिर में निरन्तर जल प्रवाहित होता है। यहां सती के दोनों घुटने गिरे थे।

48. हिगंलाज देवी शक्ति पीठः-यह शक्ति पीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में हिगंोस नदी के तट पर स्थित है।यहां उबलते हुए गरम पानी का सरोवर है। यहां शक्ति रूप के ज्योति रूप में दर्शन होते हैं। यहां सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। यहां भगवती के दर्शन करने से सभी कश्टों का निवारण होता है। यहां सती के सिर का ऊपरी भाग गिरा था।

49. इन्द्राक्षी शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ श्रीलंका में त्रिकोणेश्वर मन्दिर के समीप है। यहां सती की पायल गिरी थी।

50. मानसरोवर शक्ति पीठः- यह शक्ति पीठ तिब्बत में कैलाश पर्वत मानसरोवर पर स्थित है।यहां सती का दायां हाथ गिरा था।

51 वाराही शक्ति पीठ:- यह शक्ति पीठ पश्चिम बंगाल में पंचसागर के पास स्थित है। इसे पंचसागर शक्तिपीठ भी कहते हैं। यहां सती के नीचे वाले दांत गिरे थे।