10 अवतार

 

भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा हेतु अनेक अवतार लिए, लेकिन उनमें 10 अवतार प्रमुख रूप से स्थान पाते हैं।

1. मत्स्यावतार: भगवान विष्णु ने सृष्टि को बचाने के लिए मत्स्यावतार लिया था। सतयुग के राजा सत्यव्रत एक दिन नदी में जलांजलि देते अंजलि में एक छोटी सी मछली आई। वार्तालाप के बाद राजा द्वारा मछली से वास्तविक स्वरूप में आने की प्रार्थना पर भगवान विष्णु प्रकट हुए ।इसे चैत्र शुक्ल 3 को मनाते है।

2 कच्छपावतार: भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन में सहायता के लिए कछुऐकारूपधारणकियाथा।वैशाखशुक्ल14 कोमनातेहै।

3 वाराह अवतार: भगवान विष्णु ने जल में डूबी पृथ्वी का उद्धार व हिरण्याक्ष का संहार करने के लिए वाराह का अवतार लिया था। अवतार दिन भाद्रपद शुक्ल 3 को मनाते है।

4 नृसिंहावतार: भगवान विष्णु जी ने नृसिंहावतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध कर के अपने प्रिय भक्त प्रहलाद की रक्षा की । यह वैशाख शुक्ल 14 को सायं मनाते है।

5 वामन अवतार: देवताओं के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने देवमाता अदिति के गर्भ से वामनावतार लिया। राजा बलि से यज्ञ केसमयभगवानवामननेतीनपगपृथ्वी कोदक्षिणामेंमांगने पर दो पगों में तीनो लोक नाप लिए तथा तीसरा पग बलि के सिर पर रखने से राजा बलि को सुतल लोक पहुंचाया । इसे भाद्रपद शुक्ल 12 को मनाते है।

6 परशुराम अवतार: परशुरामावतार सतयुग में भगवान विष्णु ने जमदग्नि ऋशि की पत्नी रेणुका के गर्भ से लिया । भगवान विष्णु ने परशुराम का अवतार लेकर सभी आततायी राजाओं का नाश किया यह वैशाख शुक्ल 3 1⁄4अक्षय तृतीय1⁄2को मनाया जाता है ।

7़श्रीरामअवतारः त्रेतायुगमेंलंकापतिरावणकाबहुतआंतक था । उसके वध के लिए भगवान विष्णु ने राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या के गर्भ से पुत्ररूप में जन्म लेकर अनेक राक्षसों का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया। श्रीराम मर्यादा पुरूशोतम थे।चैत्र शुक्ल 9 1⁄4राम नवमी1⁄2 का मनाया जाता है ।

8 श्री कृष्णावतार: भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार लेकर कंस सहित अनेक दुष्टों एवं अधर्मियों का विनाश किया। भाद्रपद कृष्ण पक्ष 8 1⁄4जन्माष्टमी1⁄2 को मनाया जाता है।

9 बुद्धावतार: बौद्धधर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध भी भगवान विष्णु के अवतार है। यज्ञों में होने वाली बलिप्रथा तथा पाखण्डवाद को समाप्त कर अहिंसा और सदाचार की शिक्षा दी। वैशाख शुक्ल 15 1⁄4पूर्णिमा1⁄2 को मनाया जाता है।

10. कल्कि अवतार: भगवान विष्णु कलयुग में कल्किरूप में कलयुग व सतयुग के संधिकाल में अवतार लेगें। यह अवतार 64 कलाओं से युक्त देवदत नामक घोडे़ पर सवार होकर संसार से पापियांे का विनाश करेगे तभी सतयुग का प्रारम्भ होगा।