हिन्दुओं के प्रचलित वर्ष

भारतीय वाड्मय में चार प्रकार के वर्शों का उल्लेख है। भारत के विभिन्न-विभिन्न राज्यों में वर्शों का शुभारम्भ होता है। प्रचलित वर्श सौर वर्श है।

सौर वर्श, चन्द्र वर्श, नक्षत्र वर्श, सायन वर्श

1. सौर वर्श: मेश संक्रन्ति से मीन संक्रन्ति तक अर्थात् सूर्य मेश राशि से चलकर पुनः जब मेश राशि में आ जाए तो वह सौर वर्श होता है। सूर्य उदय से दूसरे दिन सूर्य उदय तक एक सौर दिन होता है और 365 दिन, 5 घण्टे, 48 मिनट, 46 सैकेण्ड का एक सौर वर्श होता है।

2. चन्द्र वर्श: 12 पूर्णमासियों का एक चन्द्र वर्श होता है। चैत्र शुक्ल पक्ष से फाल्गुन अमावस्या तक एक चन्द्र वर्श होता है। चन्द्रमा एक महीने में 27 दिन, 7 घण्टे, 43 मिनट, 12 सैकेण्ड चलता है और 354 दिन, 3 घण्टे, 48 मिनट, 8 सैकेण्ड का एक चन्द्र वर्श होता है।

3. नक्षत्र वर्श: पृथ्वी सूर्य की जितने समय में एक परिक्रमा करती है, उतने समय में सूर्य एक नक्षत्र से निकलकर पुनः उसी नक्षत्र में आ जाता है। उसे नक्षत्र वर्श कहते हैं। यह वर्श 365 दिन, 6 घण्टे, 12 मिनट, 37 सैकेण्ड का होता है।

4. सायन वर्श: वसन्त ़ऋतु से पुनः वसन्त ऋतु अर्थात् पृथ्वी का एक स्थान से चलकर पुनः उसी स्थान पर आ जाने का समय एक सायन वर्श है। यह वर्श 364 दिन, 5 घण्टे, 52 मिनट, 33 सैकेण्ड का होता है।

5. अधिक मास, पुरूशोतम मास: सौर वर्श और चन्द्र वर्श दोनों में एक वर्श में 10 दिन, 19 घण्टे, 36 मिनट, 19 सेैकेण्ड का अन्तर होने से ‘‘अहोरात्रै र्विमितं त्रिंशदड्ंग त्रयोदशं मासं यो निर्मिमीते’’ तीन वर्श में लगभग 31-32 दिन बढ़ने से अधिक मास आता है।

6. वर्श में चार बार नवरात्रे आते हैं।
1. चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा
2. आशाढ़ मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा (गुप्त नवरात्रे)
3. अश्विनी मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा.
4. माघ मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा (गुप्त नवरात्रे)