श्रीमद्भागवत नारायण जी का स्वरूप है

श्रीमद्भागवत महापुराण साक्षात् श्री नारायण जी का स्वरूप है। भागवत के 12 स्कन्ध भगवान के 12 अंग हैं।

प्रथम स्कन्ध              भगवान का दायां चरण है

द्वितीय स्कन्ध          भगवान का बायां चरण है।

तृतीय स्कन्ध          भगवान का दायां बाजु है

चतुर्थ स्कन्ध           भगवान का बायां बाजु है

पंचम स्कन्ध            भगवान का दायां उरो भाग

शष्ठ स्कन्ध             भगवान का बायां उरो भाग

सप्तम स्कन्ध            भगवान का दायां हाथ

अष्टम स्कन्ध    भगवान का दायां वक्ष स्थल है

नवम स्कन्ध        भगवान का बायां वक्ष स्थल है

दशम स्कन्ध            भगवान का परम पवित्र ह्रदय है

एकादश स्कन्द                 भगवान का मस्तक है।

                   द्वादश स्कन्द     भगवान का बायां हाथ जो आशीर्वादात्मक मंे है

                         “सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
                     अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः”।।

संसार के सभी मनुष्यों को सभी धर्मों का आश्रय त्यागकर केवल भगवान की शरण में रहना चाहिए। वह सभी पापों से मुक्त कर देगें तुम चिन्ता मत करो।