वेद

 

वेद मानव सभ्यता के सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं । वेदों की 28000 पांडुलिपियां पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीटयूट में रखी हुई हैं। इनमें से ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियां बहुत ही महत्वपूर्ण हैं,जिन्हे यूनेस्को ने विरासत सूची में शामिल किया है। वेद के चार भाग है:-

1 . ऋग्वेद:- ऋक् अर्थात्, स्थिति और ज्ञान ऋग्वेद सबसे पहला वेद है, जो पद्यात्मक है । इसमें 11000 मंत्र है और इसकी 5 शाखाएं है, जिसमें शाकल-वाष्कल-आश्वालायन-शांखायन- माण्डूकायन। इसमें विद्या व भौगोलिक अध्ययन है।

2. यजुर्वेद:- इसका अर्थ: यत् +जु = यजु। यत् का अर्थ होता है गतिशील तथा जु का अर्थ है आकाश, जो श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा है। यजुर्वेद में यज्ञ की विधियां,मंत्र व तत्वज्ञान है। इसकी दो शाखाएं हैं। शुक्ल यजुर्वेद-कृष्ण यजुर्वेद। जीवन शैली,पूजा विधि,कर्म काण्ड है।

3. सामवेद:- साम का अर्थ संगीत ,सौम्यता और उपासना । इस वेद में ऋग्वेद की ऋचाओं का संगीतमय रूप है । इस वेद को संगीत शास्त्र का मूल माना जाता है । इसकी तीन शाखाएं है: कौथुमीय-रागायनीय-जैमिनीय। संगीत, नृत्य, राग, उपासना का वर्णन है।

4. अथर्ववेद:- थर्व का अर्थ है कंपन और अथर्व का अर्थ अकंपन । ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है, वही अकंप बु़िद्ध को प्राप्त हो कर मोक्ष धारण करता है । इसमें रहस्यमयी….विद्याओं, जड़ी बूटियो आयुर्वेद आदि का वर्णन है। युद्ध, वैज्ञानिक, शोध, युद्धयंत्र, हथियार,ब्रह्माण्ड शोध का वर्णन है।