महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित 18 पुराण

ब्रह्म , विष्णु, महेश त्रिमूर्ति को 6-6 पुराण समर्पित है ।

1. ब्रह्म पुराण- इसमें 14000 श्लोक हैं। इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा अवतरण,रामायण और कृष्णावतार की कथायें हैं।

2. पद्म पुराण – इसमें 55000 श्लोक हैं। इसमें पृथ्वी,आकाश तथा नक्षत्रों की उत्पति का वर्णन हैं।

3. विष्णु पुराण – इसमें 23000 श्लोक हैं। इस पुराण में भारत की राष्टंीय पहचान का वर्णन हैं। उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्श ं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः।।

4. शिवपुराण – इसमें 24000 श्लोक हैं। इसमें भगवान शिव की महानता, कैलाश पर्वत, शिवलिंग तथा रूद्राक्ष का वर्णन और महत्व बताया है ।

5. भागवत पुराण – इसमें 18000 श्लोक हैं । भक्ति ज्ञान तथा वैराग्य की महानता बताई है । विष्णु और कृष्णावतार, महाभारत काल से पूर्व और पश्चात के काल का वर्णन है।

6. नारद पुराण – इसमें 25000 श्लोक हैं। इसमें मंत्र तथा मृत्यु पश्चात के क्रम आदि के विधान हैं। गंगा अवतरण, संगीत शिक्षा का ज्ञान है,जो आज भारतीय संगीत का आधार हैं।

7. मार्कण्डेय पुराण – इसमें 9000 श्लोक हैं। इसमे सामाजिक न्याय, योग के विशय में ऋर्शि मार्कण्डेय तथा ऋशि जैमिनि के मध्य वार्तालाप है ।

8 . अग्नि पुराण – इसमें 15000 श्लोक हैं । यह भारतीय संस्कृति का ज्ञानकोश हैं । इसमें मत्स्यावतार, रामायण तथा महाभारत की कथायें संकलित है ।

9. भविष्य पुराण – इस में 28000 श्लोक हैं। इस में सूर्य का महत्व, वर्श के 12 महीनों का निर्माण, सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षणिक विशयों पर वार्तालाप है। सत्य नारायण जी की कथा भी इसी पुराण में है।

10. ब्रह्म वैवर्त पुराण – इस में 18000 श्लोक हैं तथा ब्रह्म, गणेश, तुलसी , सावित्री, लक्ष्मी, सरस्वती तथा कष्ृण की महानता को दर्शाया गया है ।

11. लिंग पुराण – इसमें 11000 श्लोक हैं तथा सृष्टि की उत्पति तथा खागोलिक काल में युग, कल्प आदि का वर्णन है। अघोर मंत्रों व शिक्षा का उल्लेख है।

12. वराह पुराण – इसमें 10000 श्लोक हैं। वराह अवतार की कथा, भागवत गीता महात्मय का वर्णन हैं । इसमें सृष्टि के विकास, स्वर्ग, पाताल लोकों का वर्णन भी हैं। श्राद्व प़द्धति,सूर्य के उत्तरायण,दक्षिणायन,अमावस और पूर्णमासी का वर्णन हैं।

13. स्कन्द पुराण – इसमें 81000 हजार श्लोक हैं। भूगोलिक वर्णन, 27 नक्षत्रों, 18 नदियों, 12 ज्योतिर्लिंगों, गंगा अवतरण का वर्णन है ।

14. वामन पुराण – इसमें 10000 श्लोक हैं। वामन अवतार भरूचकच्छ में हुआ की कथा,जो सात द्वीपों, पृथ्वी, पर्वतों, नदियों तथा भारत खण्डों का भी वर्णन है ।

15. कूर्म पराण – इसमें 18000 श्लोक हैं तथा चारों वेदों का सार है। इसमें कूर्म अवतार, सागर मंथन, ब्रह्म, विष्णु, महेश, पृथ्वी, गंगा की उत्पत्ति,चारों युगों,चार आश्रम का वर्णन है।

16. मत्स्य पुराण – इसमें 14000 श्लोक हैं। मत्स्य अवतार की कथा, सृष्टि की उत्पत्ति, सौर मण्डल के सभी ग्रहों, चारों युगों तथा चन्द्रवंशी राजाओं का इतिहास वर्णित है ।

17. गरूड पुराण – इसमें 18000 श्लोक हैं तथा मृत्यु पश्चात की घटनाओं, प्रेत लोक, यम लोक, नरक तथा 84 लाख योनियों का वर्णन है। मृत्यु के बाद इसका पाठ होता है।

18.ब्रह्मण्ड पुराण – इसमें 12000 हजार श्लोक हैं। सूर्यवंशी तथा चन्द्रवंशी राजाओं का इतिहास संकलित है। सृष्टि की उत्पति , बीत चुके सात मनवन्तरों (काल) का वर्णन हैं। भगवान परशुराम की कथा इसमें दी गई है। यह विश्व का प्रथम खगोल शास्त्र है।