मटका तोड़ने का अभिप्राय

मृतक शरीर मिट्टी के घट (मटके) के समान है। जब उस मटके में जल था तो वह मटका जल से भरा अच्छा लगता था। उसी प्रकार जब तक प्राणी में श्वास थे तब तक उसके जीवन में जल रुपी धारा के समान निरन्तर प्राण चलते रहे और जब शरीर में प्राण रूपी धारा समाप्त हो गई तो शरीर भी खाली मटके के समान हो गया। मृतक शरीर खाली घड़े और आकाश के समान खाली है- ‘‘अन्तः शून्यो, वहिः शून्यः, शून्यः कुम्भ इव अम्बरे’’ –

पतंजलि के अनुसार –”कुम्भक “ शब्द का अर्थ है प्राण रूपी वायु के प्रवाह का रुक जाना।

जलधारा क्यों:- मीमांसा दर्शन के अनुसार अदृष्ट विधियाँ भी प्रमाण होती हैं-

मृतक प्राणी के चारों ओर अटूट जल धारा दी जाती है। उसका अर्थ है कि जब तक श्वास चलते रहे जीवन यात्रा भी अटूट चलती रही। अब इस लोक की जीवन यात्रा समाप्त हो गई और परलोक गमन की यात्रा शुरू हो गई। क्योंकि जल शान्ति का प्रतीक है अतः इस मृतक प्राणी की परलोक यात्रा शान्तिदायक हो। एता धारा उपयन्तु विश्वाः स्वर्गे लोके -अथर्ववेद/4.34.7
घट (मटका) कार की विधियाँ हैं। एक कारण विधि, दूसरी कर्त्तव्य विधि। याज्ञवल्कय और मनु आदि ऋषियों के अनुसार मटका फोड़ने की कारण विधि और कर्त्तव्य विधि दोनों हैं। घट-स्फोटउत्तरम प्राणान्तिक… स मृतः शुद्धयेत् सर्वाणि…उदकादीनि प्रेत कर्माणि। धर्म.सि.पृ.866
अपसव्य होकर चारों ओर जल धारा देने के वाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खाली घट (मटके) को शव के सिर के पास लाकर उल्टा करके जमीन पर फोड़ दिया जाता है।

मनु के अनुसार: मटका फोड़ने के समय मौन रहें।

‘‘यतः मृतं शरीरमुत्सृत्य काष्ठ-लोष्ट समं क्षितौ। बान्धवा विमुखा यान्ति धर्मः ………’’।।
मिट्टी से बना मटका टूटने पर पुनः मिट्टी में ही मिल जाता है, उसी प्रकार पंच महाभूतों (पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश)से बना शरीर भी पंच महाभूतों में मिल जाता है। मृतक शरीर से मोह भंग हुआ तथा प्राणी का सम्बन्ध इस मृत्यु लोक से टूट जाता है। पुत्र प्रतिज्ञा करता है कि- अब मैं परलोक यात्रा के सभी कार्य श्रद्धापूर्वक धर्म के अनुसार पूरे करूँगा ताकि मृतक आत्मा को सद्गति प्राप्त हो। मृतक के प्रति जो-जो भी प्रायश्चित आदि कार्य होगें, मैं उनको भी शुद्ध भाव से श्रद्धा पूर्वक पूरे करूँगा।

जैसे मटके की जल धारा समाप्त हो गई थी वैसे ही मृतक प्राणी की आत्मा की भी इस लोक की जीवन यात्रा समाप्त हो गई और जैसे मिट्टी का खाली मटका जोर से फोड़ने पर टूटकर समाप्त हो गया उसी प्रकार मृतक आत्मा का शरीर भी समाप्त हो गया।

कारण विधि:- जिस प्रकार मटका टूटकर समाप्त हो गया उसी प्रकार जाने वाले का जीवन भी समाप्त हो गया।

कर्त्तव्य विधि:- पुत्र कहता है कि अब मैं सभी प्रकार के पारिवारिक कर्त्तव्य का पालन करूँगा और आपके लिए जो भी धार्मिक किरया-कर्म होगें उन्हें भी कर्त्तव्य समझकर श्रद्धापूर्वक पूरे करूँगा।