बारह महीनों का नामकरण कैसे

 

भारतीय वैदिक ज्योतिश सौर मण्डल तथा नक्षत्रों के उदय-अस्त होने के आधार पर भारतीय महीनों के नाम हैं,जो पूर्णतः वैज्ञानिक है। यजुर्वेद के अनुसार सौर मण्डल के ग्रह- नक्षत्रों की स्थिति पर ही दिन, महीने तथा वर्श आश्रित होते हैं। द्वादशमासैः सम्वत्सरः“ बारह महीनों का एक वर्श होता है। जिस महीने की पूर्णमासी 1⁄4चन्द्रोदय1⁄2 काल में जो नक्षत्र दिखाई देता है उस महीने का नाम, उसी नक्षत्र के नाम पर होता है। जैसेः-

1. चित्रा नक्षत्र से चैत्र मास
2. विशाखा नक्षत्र से वैशाख मास
3. ज्येष्ठा नक्षत्र से ज्येष्ठ मास
4. पूर्वाशाढा नक्षत्र से आशाढ़ मास
5. श्रवण नक्षत्र से श्रावण मास
6. पूर्वभाद्रपद नक्षत्र से भाद्रपद मास
7. आश्विनी नक्षत्र से आश्विन मास
8. कृतिका नक्षत्र से कार्तिक मास
9. मृगशिरा नक्षत्र से मार्गशीर्श मास
10. पुनर्वसु नक्षत्र से पौश मास
11. मघा नक्षत्र से माघ मास
12. पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र से फाल्गुन मास

सूर्य के अनुसार भी 12 मास है, जिस राशि में सूर्य प्रवेश करता है,उसके अनुसार:-

1. मेश- वैशाख 2. वृश- ज्येष्ठ
3. मिथुन- आशाढ़ 4. कर्क– श्रावण
5. सिहं- भाद्रपद 6. कन्या- आश्विन
7. तुला- कार्तिक 9. धनु- पौष

11. कुम्भ-फाल्गुण 8. वृश्चिक- मार्गशीर्श

10. मकर- माघ 12. मीन– चैत्र

इस प्रकार वेदों के आधार पर वैज्ञानिक क्रम से भारतीय महीनों का नामकरण हुआ। यह काल गणना करोड़ों वर्श पूर्व की है। भारतीय महीने विश्व की प्राचीनतम और सटीक कालगणनाओं पर आधारित है।