चरण स्पर्श

वैदिक सनातन धर्म में चरण स्पर्श करने की परम्परा आदि काल से चली आ रही है। ऋग्वेद में दोनों हाथों से चरण स्पर्श करने व वाणी से शुभ आशीर्वाद का वर्णन हैंः- हस्ताभ्यां दशशारवाभ्यां जिह्वा वाचः पुरोगवी। 10-60-12. अथर्ववेद के अनुसार चरण स्पर्श सेे दोशों की निवृति कल्याण की प्रवृति होती है। अयं मे हस्तः भगवानयं मे भगवंतर। अथर्व 4-13-6. ज्ञान एवं आयु में बड़ों के चरण स्पर्श करने से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अनेक लाभ हैं। चरण स्पर्श करने का तात्पर्य है श्रद्धा से नतमस्तक होना। इससे व्यक्ति में विनम्रता आती हैं, छोटे बच्चों में संस्कार उत्पन्न होते हैं। प्राचीन समय में सुखमय जीवन होने के पीछे यही रहस्य था कि प्रत्येक व्यक्ति अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं बड़ों का चरण स्पर्श, सेवा करता था।

चरण स्पर्श करने की विधि:- प्रत्येक शरीर में विद्युत आकर्षण शक्ति होती है। वह शक्ति बिजली की दो तारों के समान होती है । सकारात्मक और नकारात्मक ।ऊर्जा. मनु ने लिखा है कि -सत्येन सत्यः स्पृष्टत्यो दक्षिनेन च दक्षिणः मनु-2/72 इसलिए दाँये हाथ से दाँया पैर ,वायाँ हाथ से वायाँ पैर स्पर्श करें इस प्रकार परस्पर दोंनों शरीरों से सकारात्मक, नकारात्मक  ऊर्जाए समान रुप से निकलती है ।

चरण स्पर्श करने का धार्मिक महत्व:- चरण स्पर्श शरीर का नहीं करते आत्मा में स्थित श्री नारायण का करते हैं। जैसे कि नर में नारायण हैं। भगवान शंकर जी ने सती माता को बताया था कि जो लोग परस्पर सत्कार, विनम्रता पूर्वक चरण स्पर्श करते हैं, वे आत्मा में स्थित परमेश्वर के चरण स्पर्श करते हैं।

वैज्ञानिक महत्व:- प्रत्येक व्यक्ति में विचित्र शक्तियां होती है। बाएं अंग में नैगीटिव और दाएं अंग में पॉजीटिव ऊर्जा रहती है। हाथों से चरण स्पर्श करते हैं तो स्पर्श करने वाला उस नकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर लेता और सिर पर या पीठ पर रखते ही आशीर्वाद में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उसी प्रकार चरण स्पर्श करने से सद्गुण आ जाते हैं। सिर पर हाथ रखने से भी वही शक्ति मिलती है जैसे डायनमों से बिजली प्रवाह होती है।

चरण स्पर्श करने के ज्योतिशीय लाभ:- माता-पिता के चरण स्पर्श करने से नवग्रहों की शान्ति, बड़े भाई बहन के चरण स्पर्श करने से मंगल, बुध, शुक्र ग्रह शांत होते हैं। वृद्ध व्यक्तियों के चरण स्पर्श करने से बृहस्पति ग्रह शांत होता है। सदाचारी, सन्त महात्माओं के चरण स्पर्श करने से शनि, राहु एवं केतु ग्रह शांत होते हैं। स्त्री का सम्मान करने से बुध, गुरु एवं शुक्र ग्रह शान्त और संकटों से मुक्ति तथा दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदलता है।

चरण स्पर्श किस प्रकार नहीं करने चाहिए:- एक हाथ से चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए। व्याघ्रपाद स्मृति में लिखा है कि – तत्सर्वं निश्फलं याति एक-हस्त चरणस्पर्शात्।। व्या. स्मृ 36 जो एक हाथ से चरण स्पर्श करता है उसके सभी पुण्य कर्म निश्फल हो जाते हैं।

अभिवादन पक्ष:- यदि कोई भगवान नाम से अभिवादन करता है जैसे राम राम जी, जय श्री कृश्ण, जय माता दी, सत् श्री अकाल आदि तो हमें भी उसका उत्तर वैसे ही देना चाहिए। साथ में दूसरों के सम्प्रदाय का भी ध्यान रखना चाहिए। जो उनकी मर्यादा के अनुरूप हो। यह परस्पर प्रेम भाव, आदर भाव, विनय शीलता, सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध बनाने का एक शिश्ट तरीका है।

चरण स्पर्श की विधि:- प्रत्येक शरीर में विद्युत के समान आकर्शण शक्ति होती है। वह शक्तिबिजली की दो तारों के समान होती है। एक सकारात्मक ऊर्जा, दूसरी नकारात्मक ऊर्जा, अतः मनु ने लिखा है कि:-
सव्येन सव्यः स्पृश्टव्यो दक्षिणेन च दक्षिणः।। मनु 2/72

इसलिए दायें हाथ से दायां पैर, बायें हाथ से बायां पैर स्पर्श करने का विधान है। इस प्रकार परस्पर दोनों शरीरों से सकारात्मक (पॉजिटिव), नकारात्मक (नैगिटिव)।ऊर्जार्एं समान रूप से निकलती हैं।