ग्रह एवं नक्षत्र आदि की दूरी

पौराणिक काल गणना के अनुसार श्रीमद्भागवत महापुराण में सूर्य सिद्धान्त एवं आर्य-भट्ट की पद्धति से आकाश मण्डल में विविध ग्रह एवं नक्षत्रो की दूरी इस प्रकार है-

1. पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी 3 लाख योजन, 24 लाख मील।
2. चन्द्रमा से नक्षत्रों की दूरी 3 लाख योजन, 24 लाख मील। 1⁄4जो कालचक्र के अनुसार सुमेरू के चारों ओर घूमते हैं1⁄2
3. नक्षत्रों से श्ुाक्र ग्रह की दूरी 2 लाख योजन, 16 लाख मील
4. शुक्रग्रह से वुध ग्रह की दूरी 2 लाख योजन, 16 लाख मील
5. वुधग्रह से मंगलग्रह की दूरी 2 लाख याोजन, 16 लाख मील
6. मंगलग्रह से बृहस्पति ग्रह की दूरी 2 लाख योजन, 16 लाख मील
7. बृहस्पति ग्रह से शनिग्रह की दूरी 2 लाख योजन, 16 लाख मील
8. शनिग्रह से सप्तर्शि मण्डल की दूरी 11 लाख योजन, 88 लाख मील सप्तर्शि मण्डल से सत्य लोक की दूरी 13 लाख योजन, 104 लाख मील
यहां ही धर्म स्वरूप में भगवान नारायण विश्णु विद्यमान हैं। इसी परम धाम में परमभक्त ध्रुव नक्षत्र रूप में भगवान की भक्ति में लीन है।
सुमेरू पर्वत के पूर्व दिशा में        इन्द्रदेव की पुरी है
दक्षिण दिशा में                      यमराज की पुरी है
पश्चिम दिशा में                      वरूण देव की पुरी है
उतर दिशा में                        कुवेर देव की पुरी है

गणना का आधार
1 योजन 4 कोस

4 कोस 8 मील