ऋषियों की वैज्ञानिक देन

 

अश्विनी कुमार: विश्व के प्रथम वैज्ञानिक । ऋग्वेद में उनके बनाए उड़ने वाले रथों तथा उड़नेवाली नौकाओं का उल्लेख है । आयुर्वेद का ज्ञान ब्रह्मा से प्राप्त हुआ । विश्पला के कटे पांव के स्थान पर धातु का पैर बनाकर लगवाया ।

चरक: शारीरिक स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य हेतू आचार रसायन औशधि रहित विशुद्ध मानसिक रसायन, विमान बनाने की विधि का अनुसंधान किया।

भरद्वाजःयन्त्रविद्या,धातुविज्ञान,अन्तरिक्ष विज्ञानएवंसूर्य रश्मि विज्ञान तथा विमान बनाने एवं संचालन की विधि सुश्रुत: शल्य चिकित्सा 1⁄4आपरेशन1⁄2 प्लसास्टिक सर्जरी, मातृ- गर्भस्थशिशुकोनिर्विध्नबाहरनिकालने कीविधिवनेत्ररोगके अविशकारक।

अगस्त्य: संस्कृति के प्रसारक , शिक्षा शास्त्री, व्याकरणकार, साहित्यकार अनेक आयुधों के आविशकारक।

वराहमिहिर: भूगर्भ जल शोधन, वास्तुशास्त्र, ज्योतिश विद्या, खगोलशास्त्र, कृशि शास्त्र, पशु रोग निदान, लेप विद्या ग्रह नक्षत्रों के ज्ञान हेतु वेध शाला आज भी उज्जैन में है। कणाद: अणु एवं परमाणु सिद्धान्त, ध्वनि एवं पदार्थ विज्ञान के प्रणेता हैं।

शालिहोत्र: पशु चिकित्सा के आचार्य आयुर्वेद के विविध विशयों के संहिताकार

नागार्जुन: रसायनशास्त्री,पारे से सोना बनाने के अभिकारक। रसरत्नाकर,लौह-शास्त्र आदि के रचयिता।

आर्यभट्ट: पृथ्वीगोल है,अपनी धुरी पर घूमती है,चन्द्र-सूर्यग्रहण की व्याख्या, बीज-गणित,ज्योतिश विज्ञान आदि के आविशकारक।

ब्रह्मगुप्तः गुरूत्वाकर्शणशक्तिसिद्धांतकेआविश्कारक,दशमलव प्रणाली के प्रणेता।

भास्कराचार्यः पृथ्वी की आकर्शणशक्ति के व्याख्याता गणित एवं खगोल ज्योतिश के प्रणेता सिद्धान्त शिरोमणि, गोलाध्याय, लीलावती आदि ज्योतिश ग्रन्थों के रचियता।

गृत्समद: अंको पर शून्य लगा कर लिखने की प्रकिया के आविशकारक ।

पतंजलि: योग शास्त्र के प्रवर्तक । योग के समान दूसरा कोई बल नहीं है।

गौतम: न्याय शास्त्र के प्रवर्तक । इनकी न्याय व्यवस्था के सूत्र आज भी प्रांसगिक है। तर्क- वितर्क के नियम इसी ग्रन्थ पर आधारित है।

कपिल: सांख्य शास्त्र के प्रवर्तक । उन्होंने कहा कि सांख्या के समान दूसरा कोई ज्ञान नहीं।

पाणिनी: संस्कृत व्याकरण के सूत्रों के रचियता। पाणिनीय अष्टाध्यायी लघुुसिद्धान्तकौमुदी,वैयाकरणसिद्धान्तकौमुदी

अत्रिः सूर्यएवंचन्द्रग्रहणकेअविश्कारकहै।